गाँव में मेरी गैंगबैंग चुदाई

लेखिका: रेहाना हुसैन  

 


 

मेरा नाम रेहाना हुसैन है। मेरी उम्र तीस साल है और मेरा फिगर ३६-२६-३४ है। जब भी मैं कहीं बाहर जाती हूँ तो सभी मर्द मुझे कामुक नज़रों से देखते हैं। मुझे भी ये बहुत पसंद है कि सभी मर्द मुझे देखें। मेरे निकाह को पाँच साल हो गये हैं और मेरे शौहर दुबई में रह कर नौकरी करते हैं। साल में एक-दो बार घर आना हो पाता है वो भी हफ्ते या दो हफ्ते के लिये। जब भी मेरे शौहर आते थे तो हम दोनों जम कर चुदाई करते थे लेकिन उनके जाने के बाद मैं चुदाई के लिये बहुत भूखी हो जाती थी। मोमबत्तियों और खीरे जैसी बे-जान चीज़ों का सहारा लेना पड़ता था लेकिन तसल्ली नहीं हो पाती थी।

 

इसलिये मैंने सोचा कि इस तरह तड़पने से तो अच्छा है कि क्यों ना किसी और मर्द से चुदवा लूँ। पहले तो मैंने बहुत सोचा कि ये गलत है पर क्या करती चूत मान ही नहीं रही थी मेरी। चूत को तो लन्ड चाहिये थे बस। दिन - रात मैं हर वक्त बस चुदाई के बारे में सोचने लगी। किसी और चीज़ में मन ही नहीं लगता। चाहे कोई भी हो मैं हर मर्द को गंदी नज़रों से ही देखती। मेरी नज़र हमेशा मर्दों की टाँगों के बीच में ही जम जाती थी। हद ये हो गयी थी कि कोई जानवर भी दिख जाता तो नज़रें उसके लन्ड को ही ढूँढतीं।

 

इसलिये मैंने सोच लिया था कि अब तो किसी ना किसी का लन्ड जरूर लूँगी। मुश्किल ये थी कि किस से चुदवाया जाये तो इस बारे में मैंने अपनी सहेली से बात करने की सोची। उसका शौहर भी दूसरे मुल्क में नौकरी करता था तो इसलिये वो अक्सर गैर-मर्दों से चुदवाया करती है। मेरी सहेली का नाम रुबिना है और उसकी उम्र बत्तीस साल है और दिखने में वो भी काफी सैक्सी है पर मेरे से कम सैक्सी और हॉट है वो। हम दोनों कॉलेज में साथ थीं और नये-नये यारों से चुदवाती थीं और खूब मौज-मस्ती करती थीं।

 

एक दिन मैं उसके घर गयी। हम दोनों बैठी पैग लगा रही थीं तो दो पैग पीने के बाद मैंने उससे इस बारे में ज़िक्र किया। उसने कहा कि चुदाई के लिये वो मुझे अपने एक यार से मिलवा देगी। उसने मुझे बताया कि उसके सभी यार गुँडे मवाली किस्म के हैं। मैंने उससे पूछा कि तूने ऐसे यार क्यों बनाये तो उसने कहा कि ऐसे मर्दों से चुदवाना उसे अच्छा लगता है और उनमें जोश भी ज्यादा होता है और वो जम कर चोदते हैं जिससे उसकी पूरी तरह तसल्ली हो जाती है। मुझमें तो चुदाई की भूख थी तो मैंने कहा जैसा मरज़ी मर्द हो... मुझे तो लन्ड चाहिये बस और वो भी उसी वक्त। इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

 

तभी उसने अपने एक यार को फोन लगाया और उससे मेरी बात की और कहा कि अभी नयी चूत चोदनी है क्या? उसके यार का नाम विशाल था। विशाल ने कहा कि वो तैयार है और अभी आ जायेगा मुझे लेने के लिये। मैं बहुत नर्वस थी क्योंकि मैं पहली बार किसी और से चुदवाने जा रही थी शादी के बाद। और करती भी क्या... इतनी चुदासी थी कि मुझे तो लन्ड चाहिये थे बस। मैंने खुद को रिलैक्स करने के लिये एक और तगड़ा पैग लगाया।

 

तकरीबन ५० मिनट बाद विशाल मुझे लेने के लिये आ गया। उसकी उम्र तकरीबन २३-२४ साल की होगी और उसका जिस्म भी बहुत हट्टा-कट्टा और गठीला था। उसकी हाइट ६ फीट होगी। उसने आते ही रुबीना को किस किया और उसके बोब्बे उसके कपड़ों के ऊपर से ही दबाने लग पड़ा। उसके बाद उसने मुझे अपने साथ चलने को कहा तो मैंने रुबीना को बॉय कहा और उसकी गाड़ी में जा कर बैठ गयी। मुझे लन्ड लेने की इतनी जल्दी थी कि उससे पूछा भी नहीं कि कहाँ जा रहे हैं। हम पहले नॉर्मल बातें करते रहे। मैं रुबिना के घर पर शराब के तीन पैग पी कर निकली थी और मुझ पर नशा सवार होने लगा था और मेरा मूड बहुत ज्यादा सैक्सी हो गया था। मैंने बिल्कुल बेशरम होकर उसकी जाँघ पर हाथ रख दिया और उसकी जीन्स के ऊपर से ही मैं उसके लन्ड को सहलाने लगी।इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

 

ये सब देख कर उसका लन्ड भी कड़ा हो गया। विशाल ने अपनी कार सड़क के एक किनारे पर रोक ली। तभी हम दोनों एक दूसरे को किस करने लग पड़े। हमारी दोनों की जीभें एक दूसरे के मुँह में थी और मुझे वो बहुत उत्तेजित लग रहा था। उसने मुझे अपने कपड़े उतारने को कहा। मैंने उससे कहा कि यहाँ सड़क पर कोई देख लेगा तो उसने कहा कि ये सड़क एक सुनसान सड़क है जहाँ ट्रैफिक कम ही होता था और शाम के वक्त यहाँ कोई नहीं आता जाता है। मैंने दोनों तरफ़ देखा तो कोई भी नहीं था दूर-दूर तक।

 

वैसे भी नशे की खुमारी और उत्तेजना में मुझे चुदाई करने के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा था। मैंने फौरन अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये। मैं अपने कपड़े धीरे-धीरे उतार रही थी तो इस बात पर विशाल को गुस्सा आ गया और उसने एक दम से मेरे सूट की कमीज़ खींच कर आधी फाड़ कर उतार दी और कहने लगा साली इतनी देर क्यों लगा रही है जल्दी कर! मेरे सूट की कमीज़ अब काफी हद तक फट चूकी थी और मैंने ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी। उसके बाद विशाल के तेवर देखते हुए मैंने अपने सैंडल खोले बगैर ही जल्दी से अपनी सलवार और पैंटी भी उतार दी। विशाल भी नीचे से पूरा नंगा था। इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

 

उसका नौ इंच का लन्ड देख कर मैं हैरान हो गयी क्योंकि इतना बड़ा लन्ड हकीकत में मैंने पहली बार देखा था। तभी विशाल ने मुझे कहा, साली रंडी अब इसे देखती ही रहेगी क्या? चल साली रंडी इसे अपने मुँह में डाल और अच्छी तरह से चूस इसको! अब विशाल मेरे से एक दम टपोरी वाली ज़ुबान में बात कर रहा था। मैंने तभी उसका लन्ड चूसना चालू कर दिया। मुझे लन्ड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैं तकरीबन दस मिनट तक उसका लन्ड चूसती रही। तब तक मेरी चूत गीली हो चूकी थी। अब मैं उसका लन्ड चूत में लेना चाहती थी पर कार में जगह कम होने की वजह उसने मुझे कहा कि वो मुझको बाहर चोदेगा। हम दोनों कार के बाहर आ गये। उसने मेरी चूत में अपना लन्ड डाल दिया और मुझे चोदने लग पड़ा। वो पहले धीरे-धीरे से और फ़िर वो और तेज हो गया। जैसे-जैसे उसका लन्ड मेरे अंदर जा रहा था मुझे और मज़ा आ रहा था। सिर्फ ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने मैं पूरी नंगी हो कर सड़क के किनारे पर चुद रही थी।

 

मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं कभी ऐसे भी चुदवाऊँगी। तकरीबन बीस-पच्चीस मिनट तक चोदने के बाद उसका माल निकल गया और उसने अपना सारा माल मेरे जिस्म पर गिरा दिया। मुझे चुदाई करने में बहुत मज़ा आया था पर मेरी अभी तक पूरी तरह से तसल्ली नहीं हुई थी। उसने मुझे अपने कपड़े पहनने को कहा तो मैंने उससे कहा- अभी मुझे और चुदवाना है। विशाल बोला, साली रंडी! लगता है तूने लन्ड नहीं लिया बहुत समय से...? तो मैंने कहा कि हाँ! मैंने बहुत वक्त से लन्ड नहीं लिया है।

 

विशाल ने कहा कि अगर मुझे और चुदना है तो अपने दोस्तों से चुदवा देगा क्योंकि अब वो और नहीं चोद सकता क्योंकि वो पहले ही सुबह से पाँच औरतों को चोद चुका है और इसलिये थक गया है। मैं नशे में थी। मैंने कहा, मुझे लन्ड चाहिये बस! विशाल ने कहा,  लेकिन एक शर्त है! मैंने कहा कि मुझे उसकी सब शर्तें मंज़ूर हैं बस मेरी चूत की प्यास किसी तरह शाँत करवा दे। वो बोला,  सोच ले... मेरी और मेरे दोस्तों की हर बात माननी पड़ेगी... हम जैसे चाहें तुझे चोदेंगे और तू मना नहीं करेगी! कहाँ तो मैं एक मर्द से चुदने के लिये इतनी तड़प रही थी और अब मुझे दो-तीन लण्ड मिलने वाले थे। मैंने बिना सोचे खुशी-खुशी हाँ कर दी। वो बोला,  चल साली रंडी... कार में बैठ जा जल्दी... तुझे और लन्ड दिलवाता हूँ! वो मुझे अपनी कार में अपने घर ले कर जाने लगा। तकरीबन एक घंटे के बाद हम उसके गाँव में पहुँच गये।

 

उसका घर एक गाँव में था जहाँ बहुत कम घर थे और वहाँ पहुँचते हुए रात के आठ बज चुके थे और पूरी तरह से अंधेरा हो गया था। उसने मुझे बताया कि जहाँ पर उसका घर है वहाँ उस तरफ़ के इलाके में कोई औरत नहीं रहती,  बस उनका अड्डा है जहाँ वो  मस्ती करते हैं। उसने अपनी गाड़ी एक किनारे पर खड़ी कर दी और मुझे अपनी कार में ही नंगी होने को कहा।

 

मैंने उसे मना कर दिया तो उसे गुस्सा आ गया और उसने मुझे एक थप्पद मार दिया और मेरे सूट की कमीज़ पूरी तरह से फाड़ दी और निकाल कर बाहर फेंक दी। मैंने सोचा कि कार में ही तो नंगी होने को कह रहा है इसलिये उसकी बात मान कर मैंने सलवार उतार दी और तुरंत पूरी नंगी हो गयी। तभी उसने मुझे नंगी ही कार से नीचे उतरने को कहा  ओर बोला,  दूर सामने जो घर है वो मेरा ही घर है और तुझे वहाँ तक ऐसे ही जाना है। वहाँ से उसका घर तकरीबन एक किलोमीटर होगा। वहाँ ना के बराबर आबादी थी इसलिये खेतों के पार इतनी दूर से भी वो घर दिखायी दे रहा था। इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

 

मैंने विशाल से कहा,  प्लीज़ ऐसा मत करो कोई देख लेगा... मैंने ड्रिंक भी कर रखी है.... वहाँ तक चल कर जाना मुश्किल होगा!

 

वो बोला,  चूतिया साली रंडी! ज्यादा नाटक मत कर... कोई नहीं देखेगा तुझे और अगर देख भी लिया तो क्या होगा साली... जितनी जल्दी करेगी उतना ही अच्छा होगा वरना रास्ते में जो मिलेगा तुझे चोद देगा। मेरे पास लोई चारा नहीं था तो मैं धीरे से कार से नीचे उतरी।  उसने तुरंत अपनी कार स्टार्ट की और वहाँ से भगा कर अपने घर ले गया। अब मैं सिर्फ ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने वहाँ पूरी नंगी खड़ी थी। मुझे बहुत शरम आ रही थी कि कोई मुझे इस हालत में देख लेगा तो क्या होगा। मेरा सारा सामान विशाल की कार में पड़ा हुआ था।

 

अब मैंने उसके घर की तरफ़ जाना शुरु कर दिया। उस सड़क पर एक दम अंधेरा था और जैसे जैसे मैं आगे जा रही थी तो रोश्‍नी आनी चालू हो गयी थी। तकरीबन दस मिनट तक मैं ऊँची पेंसिल हील की सैन्डल पहने नंगी उस कच्चे रास्ते पर चलती रही और अभी आधा रास्ता भी तय नहीं हुआ था। नशे में थोड़ा सिर घूम रहा था और मैं बहुत ज्यादा डर रही थी। तभी एक दम से पीछे कोई गाड़ी आने की आवाज़ आयी और मैंने घबराहट में भागना चालू कर दिया। ऊँची पेंसिल हील की सैन्डल और नशे की हालत में भागना आसान नहीं था पर फिर भी जितना मुझसे हो सका, जैसे-तैसे मैं भागी। अभी मैं थोड़ा दूर तक ही भागी थी कि पीछे से एक सफारी कार आयी और उन्होंने मुझे देख लिया और कार एक दम मेरे पास ला कर रोक दी। इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

 

उसमें दस मर्द मौजूद थे। तभी एक बोला,  लगता है ये ही  विशाल का नया माल है तभी तो ऐसे सड़क पर नंगी घूम रही है! तभी उन्होंने मुझे कहा कि चल आजा अंदर आ जा! तुझे विशाल के घर ले जाते हैं... हम भी वहीं जा रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि विशाल ने मुझे कहा है कि किसी से लिफ्ट लेकर मत आना वरना वो मुझे सज़ा देगा... इसलिये प्लीज़... खुदा के लिये मुझे ऐसे ही जाने दो! तभी उनमें से एक ने कहा वो हमारा ही दोस्त है और उसने ही हमें बुलाया है... कुछ नहीं कहेगा... चल साली रंडी कुत्तिया... आ  जा अंदर... ज्यादा नखरे मत कर!

 

मैंने उनकी बात मान ली पर उनकी गाड़ी पूरी तरह से भरी हुई थी और बैठने के लिये कोई जगह नहीं थी। तभी उन्होंने मुझे अंदर खींच लिया और पीछे जो चार मर्द बैठे थे उन्होंने अपने पास बिठा लिया। मैं अब एक कार में दस मर्दों के बीच में नंगी पड़ी हुई थी। वो कह रहे थे क्या माल फ़सा कर लाया है विशाल! यार ये तो बड़ी मस्त है!

 

कोई मेरे बोब्बे दबा रहा था तो कोई चूत में उँगली देने लगा तो कोई गाँड में। सभी ने शराब पी रखी थी और उनमें से कुछ के हाथ में शराब की खुली बोतलें भी थीं। उनमें से एक मर्द ने मेरे मुँह में भी वो देसी शराब उड़ेल दी। मुझे बहुत अजीब महसूस हो रहा था और बहुत ज्यादा शरम आ रही थी। मेरी आँखों में तो आँसू आ गये थे। वासना में अंधी हो कर विशाल और उसके दोस्तों से चुदने के लिये मैंने ही तो ज़िद्द करी थी।

 

तभी उन्होंने गाड़ी विशाल के घर के आगे रोक दी और मुझे नीचे उतार दिया। सभी दस मर्द भी नीचे उतर गये। तभी उनमें से एक बोला,  यार इस कुत्ती को अपनी गुलाम बना लेते हैं! तभी उनमें से एक मर्द ने मेरी गर्दन में कुत्ते वाला पट्टा बाँध दिया और मुझे एक कुत्ती कि तरह अपने दोनों हाथ और पैरों के बल चलने का हुक्म दिया।

 

मैंने वैसा ही किया जैसा उन्होंने कहा था। फ़िर वो मुझे कुत्ती कि तरह विशाल के घर के अंदर ले गये। वहाँ जो मैंने देखा वो देख कर मैं हैरान रह गयी। वहाँ पर आठ मर्द पहले से ही मौजूद थे। मैं इतने मर्द देख कर डर गयी और विशाल से मिन्नत करने लगी कि प्लीज़ मुझे जाने दो! मैं इतने जनों से नहीं चुदवा पाऊँगी। इस बात पर सभी हंसने लगे और विशाल बोला कि सभी लड़कियाँ पहले ऐसे ही कहती हैं! तेरी सहेली रुबिना भी पहले ऐसे ही बोली थी पर अब देख वो किस तरह मस्त हो कर दर्जनों मर्दों से एक साथ चुदवाती है! मुझे रूबिना पर बहुत गुस्सा आया कि उसने मुझे कहाँ फंसा दिया। इस कहानी की लेखिका रेहाना हुसैन है!

 

तभी विशाल ने सफारी कार वाले मर्दों से पूछा के क्या मैं चल कर आयी हूँ या उनकी कार में तो उन्होंने कहा कि कार में। इस बात पर विशाल को बहुत गुस्सा आया और उसने मुझे कहा,  साली भेनचोद रंडी! मैंने कहा था ना कि पूरा रास्ता चल कर आना है तो तू इनकी कार में क्यों आयी? अब तुझे इसकी सज़ा मिलेगी। मैंने कहा,  इन सभी ने कहा था कि ये तुम्हारे दोस्त हैं तो इसलिये इनके साथ चलूँ... तुम मुझे कुछ नहीं कहोगे अगर मैं इनके साथ आ भी जाती हूँ!

 

विशाल ने कहा,  भेनचोद! कोई भी मेरा नाम लेगा तो उसके साथ चली जायेगी क्या ऐसे ही?  सज़ा तो मिलेगी तुझे और अगर अब तू कुछ बोली तो सज़ा और बढ़ती जायेगी और वैसे भी यहाँ आस पास कोई नहीं रहता जितना मरज़ी चींख लेना... यहाँ पर कोई नहीं सुनेगा तेरी... इसलिये भलायी इसमें ही है कि चुप चाप जो मैं कहता हूँ वो ही करती रह। विशाल ने मुझे कहा कि तेरी सज़ा तुझे कल देंगे... अभी फ़िलहाल वक्त के लिये माफ़ कर रहा हूँ पर कल को सज़ा जरूर मिलेगी!

 

मैं खुश हो गयी कि अब तो सज़ा से बच गयी। तभी सभी अठारह मर्द नंगे हो गये। सभी के लन्ड सात इंच से ज्यादा के थे। मैं सोच रही थी कि आज इतने लन्ड मैं कैसे ले पाऊँगी। उन्होंने मुझे देसी ठर्रे की बोतल पकड़ायी और पीने को कहा। पहले कभी देसी शराब नहीं पी थी। बहुत ही तीखा अजीब सा स्वाद था पर मैंने गटागट वो आधी बोतल पी डाली। इतने में ही ज़ोरदार नशा चढ़ गया और मैं झूमने लगी। तभी सभी मर्दों ने मुझे बीच में ज़मीन पर बिठा लिया और मेरे चरों तरफ़ एक घेरा बना लिया। अब मैं सभी के लन्ड चूसने लग पड़ी। मैं कभी किसी का लन्ड चूस रही थी तो कभी किसी और का।

 

इसी बीच में किसी ने मेरी चूत में लन्ड भी डाल दिया। एक और जने ने मेरी गाँड मारनी चालू कर दी। जब गाँड में लन्ड घुसा तो बहुत तेज दर्द होने लगा। मेरी दर्द के मारे जान निकली जा रही थी। मेरे मुँह से कोई आवाज़ भी नहीं निकल रही थी क्योंकि मुँह में भी लन्ड डला हुआ था। अब मेरी हर तरफ़ से चुदाई हो रही थी। मेरे तीनों छेदों, चूत,  गाँड और मुँह में लन्ड थे। उसके अलावा मैंने अपने दोनों हाथों में भी लन्ड पकड़ रखे थे और कईं जने मेरे बोब्बे दबा रहे थे। दो जने झुक कर मेरी दोनों बगलों में अपना लन्ड रगड़ रहे थे और दो जने मेरे दोनों पैर पकड कर मेरे सैंडलों पर अपने लन्ड रगड़ रहे थे। इस कहानी की लेखिका रिहाना हुसैन है!

 

हद तो तब हो गयी जब उन्होंने  मेरी चूत में एक ही वक्त पर दो लण्ड घुसाने शुरू कर दिये। मैंने कहा,  प्लीज़ खुदा के वास्ते ऐसा मत करो मेरी चूत फट जायेगी... मैं दो लन्ड नहीं ले पाऊँगी! पर सभी मर्द चुदाई के नशे में चूर थे। वो मेरी बात कहाँ सुन रहे थे... बस चुदाई में मसरूफ थे।

 

तभी एक तेज झटके ने मेरी बहुत जोर से चींख निकाल दी। मेरी चूत में दो लन्ड एक साथ जा चुके थे। मेरी चूत में बहुत तेज़ दर्द होने लगा था और मेरी आंखों में आँसू आ गये थे। 

 

पर अभी तो मेरी चुदाई स्टार्ट हुई थी। अभी तो सिर्फ़ छः-सात जनों ने ही मुझे चोदा था। ऊपर से पूरी रात अभी पड़ी थी। सभी मुझे चोद रहे थे बारी-बारी से। सभी अपना वीर्य मेरे जिस्म पर ही गिरा देते या मेरे मुँह में। मेरा पूरा चेहरा और जिस्म उन मर्दों के पसीने और वीर्य से भर गया था। चुदाई करते हुए सुबह के तीन बज चुके थे पर उन मर्दों की चुदाई की भूख कम नहीं हो रही थी। हर किसी ने कम से कम दो बार वीर्य निकाल दिया होगा मेरे ऊपर और अब भी चोद रहे थे मुझे। इस वहशियाना चुदाई में मज़ा तो मुझे भी खूब आ रहा था।

 

ऐसा सुबह तक चलता रहा और वो सुबह के सात बजे तक मुझे चोदते रहे। मेरे पूरे जिस्म पर वीर्य था और उन मर्दों का पसीना। अब तो दिन भी चढ़ने लगा था। सभी मर्दों ने अब चुदाई बंद कर दी थी और मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थे। मुझसे चला भी नहीं जा रहा था ठीक तरह से। तभी विशाल ने मुझे कहा कि तुम्हें रात कि सज़ा मिलनी अभी बाकी है। मैंने विशाल से कहा,  अब कोई सज़ा मत देना प्लीज़... मैंने तुम लोगों का हर तरह से चुदाई में साथ दिया और मुझे मज़ा भी आया लेकिन मेरी हालत अब बहुत खराब है इतनी चुदाई करवा कर।

 

इस बात पर विशाल और गुस्सा हो गया और कहने लगा,  साली रंडी! तुझे कहा था ना कुछ बोलना मत और अब तुझे डबल सज़ा मिलेगी! मैं चुप कर गयी और कुछ देर बाद कहा,  ठीक है मुझे तुम्हारी हर सज़ा मंज़ूर है पर बताओ तो सही करना क्या है?  इस पर विशाल ने अपने एक दोस्त को कार में से मेरे कपड़े लाने को कहा। वो जल्दी से मेरे कपड़े ले कर आ गया। मेरे सूट की कमीज़ तो विशाल ने पहले ही काफी हद तक फाड़ दी थी। इस बार विशाल ने मेरे पूरे सूट को फाड़ दिया और सिर्फ़ मेरी पैंटी बची थी।

 

उसने मुझे मेरी पैंटी दी और कहा ये लो इसे पहन लो और घर चली जाओ। मैंने विशाल से कहा,  मैं ऐसे घर नहीं जा सकती इस हालत में! इस पर उसने कहा,  ठीक है अगर तुम्हे कपड़े चाहिये तो वो तुम्हें यहाँ से दो किलोमीटर दूर एक घर है... वहाँ मिलेंगे और तुम्हे वहाँ तक नंगी ही जाना पड़ेगा और वो भी चल कर। ये मेरी पहली सज़ा थी। मैंने मना नहीं किया और मान गयी। रात भर अठारह मर्दों से चुदने के बाद मैं पक्की बेशरम बन चूकी थी।

 

मैं तुरंत घर के बाहर आ गयी विशाल के साथ और उसने मुझे उस घर का रास्ता भी समझा दिया जहाँ जा कर मुझे अपने कपड़े लाने थे। अब दिन का वक्त था और सुबह के साढ़े सात बज चुके थे। उस छोटे गाँव में ले दे कर एक बीड़ी फैक्ट्री थी इसलिये उस गाँव में ज्यादातर सिर्फ मर्द ही रहते थेजो उस फैक्ट्री में मज़दूरी करते थे। अब मैं बेशरम बन कर गाँव में मादरजात नंगी ही ऊँची हील की सैंडल खटखटाती चल पड़ी। वैसे तो वो रास्ता सुनसान ही था पर बीच में इक्का-दुक्का लोग आ जा भी रहे थे और सभी मेरी तरफ़ देख रहे थे। शायद विशाल के चुंगल में फंसी मेरी जैसी हालत में और औरतें भी देखी होंगी उन्होंने पहले। इस कहानी की लेखिका रिहाना हुसैन है!

 

पूरी रात की घमासान चुदाई की वजह से मैं ठीक तरह चल नहीं पा रही थी। दारू का नशा भी उतरा नहीं था और पैरों में ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल भी थे। सैंडल उतार देती पर गाँव के कच्चे पत्थरीले रास्ते पर नंगे पैर चलने से तो ऊँची हील के सैंडल पहन कर दो किलोमीटर चलना ज्यादा मुनासिब था। सबसे पहले दो मर्दों ने मुझे नंगी देखा। उन्होंने मेरे को वहीं पर पकड़ लिया और उन्होंने मुझे वहीं पर चोदना चालू कर दिया। मैंने भी कोई ऐतराज़ नहीं किया और खुशी से अमादा हो कर चुदाई में शामिल हो गयी। अभी वो मुझे चोद ही रहे थे कि वहाँ पर और तीन आदमी आ गये। उन्होंने भी मुझे चोदने का मन बना लिया। इस तरह वहाँ पर अब पाँच मर्द मुझे चोदने लगे। मेरी चूत और गाँड तो अब तक बहुत खुल चूकी थी क्योंकि रात में मैंने एक साथ दो-दो लन्ड लिये थे अपनी चूत में।

 

अब उन्होंने मुझे वहीं कच्ची सड़क के किनारे ले जकर चोदना स्टार्ट कर दिया। सभी चुदाई के भूखे थे और मेरे ऊपर कुत्तों की तरह टूट पड़े। अब मुझे पाँच मर्द चोद रहे थे। एक लन्ड मेरी चूत में,  दूसरा मेरी गाँड में और तीसरा मेरे मुँह में,  चौथा और पाँचवा मेरे हाथों में। उन सभी ने बारी-बारी से अपनी जगह बदली और तकरीबन डेढ़-दो घंटे तक मुझे वहीं चोदते रहे। जब चुदाई खत्म हुई तो वो मुझसे पैसे माँगने लगे। मैंने हैरान हो कर पूछा कि किस बात के पैसे, तो वो वो बोले कि तेरी चुदाई करने के पैसे। जब मैंने कहा कि मेरे पास तो इस वक्त पैसे नहीं हैं तो वो मुझे गालियाँ बकते हुए अपने रास्ते चले गये।

 

मैं उठ कर आगे चल पड़ी। अब मैं बहुत धीरे चल रही थी क्योंकि मेरी बहुत ज्यादा चुदाई हो चूकी थी और मैं बहुत थक चूकी थी और मुझे मालूम था कि अभी और चुदाई होगी। मैं तकरीबन साढ़े दस बजे उस घर में पहुँची तो देखा कि वहाँ पर ताला लगा हुआ था और बाहर एक पर्ची थी जिस पर लिखा था कि तुम यहाँ देर से पहुँची हो,  इसलिये तुम्हारे कपड़े वहीं पर पहुँचा दिये गये हैं जहाँ से तुम आयी हो। इसलिये वापिस चली जाओ। मैं ये पढ़कर वापस जाने लगी। मैं ये सोच रही थी कि अगर फ़िर से रास्ते में कोई मिल गया तो फिर से चुदाई हो जायेगी और फिर से लेट हो जाऊँगी। इस कहानी की लेखिका रिहाना हुसैन है!

 

मैं थक भी गयी थी और मेरी टाँगें भी दुख रही थीं पर मैं फिर भी जितना हो सके तेज़ चलने लगी। इस बार मुझे रास्ते में चार आदमी और मिले और उन्होंने भी मेरी चुदाई स्टार्ट कर दी वहीं सड़क पर। तकरीबन डेढ़ घंटे तक मैं उनसे बारी-बारी से चुदवाती रही। मैं हैरान थी कि इन मर्दों ने भी मुझसे मेरी चुदाई करने के पैसे माँगे। जब मैंने कहा कि उन्हें देने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है तो वो भी मुझे उल्टा-सीधा कहते हुए आगे बढ़ गये।

 

उसके बाद मैं वहीं पहुँच गयी जहाँ से आयी थी। मैंने विशाल से कहा,  अब तो मेरी सज़ा हो गयी है... प्लीज़ अब मेरे कपड़े दे दो! इस पर उसने कहा,  अभी तो तेरी एक सज़ा पूरी हुई है... अभी दूसरी बाकी है और तेरी दूसरी सज़ा बहुत ही मुश्किल होगी। उसके बाद उसने कहा कि तुझे आज भी यहीं रहना पड़ेगा और कल सुबह तू यहाँ से जायेगी! उसके बाद विशाल ने मुझे खाना और पानी दिया और कुछ देर के लिये आराम करने को कहा। मैंने तकरीबन दो घंटे आराम किया।

 

अभी मैं सो रही थी कि विशाल ने आ कर मुझे उठा दिया और कहने लगा,  अगर अबकि बार कुछ भी बोली तो सज़ा और बढ़ा दी जायेगी इसलिये जो कहता हूँ चुपचाप करती जा। मैं कुछ भी नहीं बोली और चुप रही। अब दोपहर के तकरीबन एक बज चुके थे और अभी भी मैं नंगी ही थी।

 

विशाल ने मुझे कहा,  आज तुझे और बहुत जनों से चुदना है! अब तो मैं बेशरम बन चूकी थी और मेरी चूत,  गाँड और मुँह सभी छेद बहुत बुरी तरह चुद चुके थे और अच्छी तरह से खुल चुके थे क्योंकि मैंने सभी में बहुत मोटे-मोटे लन्ड लिये थे। विशाल ने मुझे कहा कि तेरी दूसरी सज़ा ये है कि तुझे आज शाम के सात बजे तक गाँव में से दो हज़ार रुपये कमा कर लाने हैं और वो भी नंगी रह कर ही और अगर सात बजे से लेट हुई या पैसे कमा कर नहीं ला पायी तो तेरी चुदाई पूरे एक हफ़्ते तक होती रहेगी!

 

मैं ये सुनकर कुछ नहीं बोली क्योंकि अगर कुछ बोलती तो मेरी सज़ा विशाल और बढ़ा सकता था। ये सब बातें सुनकर मैं बहुत डर गयी और सोचने लगी कि अगर मैं पैसे ना ला पायी तो पता नहीं क्या होगा आज मेरे साथ। मैं ये सोच ही रही थी और अपने ख्यालों में खोयी हुई थी कि तभी मुझे विशाल ने एक जोर से थप्पड़ मारा और कहा साली रंडी! यहीं खड़ी रहेगी अब क्या?  चल हरामज़ादी जल्दी से नहा-धो कर बाहर जाने की तैयारी कर और चुदवा कर पैसे कमा कर ला।

 

मैं सैंडल उतार कर बाथरूम में जा कर जल्दी-जल्दी नहायी और जिस्म पोंछ कर फिर से पैरों में अपने ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहन लिये। मेरे पर्स में लिप्स्टिक पाऊडर वगौरह था तो मैंने हल्का मेक-अप भी कर लिया। तभी मुझे मेज पर देसी ठर्रे की बोतल दिखायी दी जिसे उठा कर मैं मुँह लगा कर पीने लगी। पीते-पीते मैंने सोचा कि मैं पूरी कोशिश करुँगी दो हज़ार रुपये कमाने की और ना कमा सकी तो  जो भी होगा देखा जायेगा। इतने दिनों से मैं चुदने के लिये ही तड़प रही थी और जब अल्लाह के करम से मुझे इतनी चुदाई नसीब हो रही है तो क्यों ना खुल कर मज़े लूँ। इस कहानी की लेखिका रिहाना हुसैन है!

 

इतने में विशाल फिर कमरे में आया और चिल्लाते हुए कहा कि साली यहाँ खड़ी दारू पी रही है! चल वक्त बर्बाद न कर और सात बजे के पहले रुपये कमा कर ला! अब मैं एक बार फिर से बस ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने बिल्कुल नंगी ही बाहर चल पड़ी। मेरे एक हाथ में ठर्रे की बोतल थी और मैं अब एक पूरी रंडी बन चूकी थी और मैं फैसला कर चुकी थी कि मैं रंडी ही बन जाऊँगी और फ़्री में लोगों से  ऐसे ही चुदवाया करूँगी। खैर अभी तो मुझे ऐसे मर्द ढूँढने थे जो मुझे चोदें और पैसे भी दें पर गाँव में ये काम बहुत मुश्किल था क्योंकि वहाँ पर सभी फ़्री में चोदने वाले गरीब लोग थे। सुबह तो कुछ गाँव वालों ने मुझसे ही मुझे चोदने के पैसे माँगे थे। अब मैं शराब पीती हुई नशे में झूमती हुई गाँव कि उस तरफ़ चल पड़ी जहाँ पर मज़दूरों की छोटी सी बस्ती थी और उस तरफ़ मर्द भी ज्यादा रहते थे। वो इलाका एक गंदी बस्ती जैसा था र मेरे पास और कोई चारा नहीं था।

 

मैं वहाँ पर अंदर घुस गयी और तभी मेरी तरफ़ मर्दों की भीड़ जमा होनी शुरू हो गयी। मैं ये देखकर हैरान रह गयी कि वहाँ करीब तीन-चार औरतें और भी थीं जो अलग-अलग जगह पर गाँव के कईं मर्दों से ग्रुप-चुदाई करवा रही थीं। उन्हें देखकर साफ ज़ाहिर था कि ये गाँव की रहने वाली औरतें नहीं थीं बल्कि मेरी ही तरह शहर से आयी हुई अमीर औरतें थीं। मैंने तभी उन मर्दों से कहा कि आप सब मेरी चुदाई कर लो पर इसके बदले में मुझे पैसे चाहिये। इस पर वो कहने लगे कि पहले चुदाई होगी तेरी और बाद में पैसे दे देंगे तुझे थोड़े बहुत! फिर मेरी चुदाई वहीं पर स्टार्ट हो गयी।

 

अल्लाह जाने मेरे अंदर घंटों इतनी चुदाई करवाने ताकत कहाँ से आ गयी थी। पिछली शाम से मैं कितने ही मर्दों से बेतहाशा चुदी थी और अब फिर चुदने के लिये तैयार थी। सभी मर्द मेरे को चोदने के लिये आ गये। वहाँ पर भीड़ इतनी बढ़ गयी कि कोई भी मुझे चोद नहीं पा रहा था। तभी उनमें से जो थोड़ा नेता किस्म का था उसने कहा,  बारी-बारी से चोद लेना सभी लोग और एक लाइन लगा लो सभी मर्द! तकरीबन बीस-पच्चीस मर्द होंगे वहाँ पर। उन सभी ने लाइन लगा ली और बारी-बारी से मुझे चोदने लगे।

 

मुझे कुछ नहीं होश था कि मुझे कौन-कौन चोद रहा था। बस मैं तो अब ऐसे ही गंदी गली में ज़मीन पर पड़ी थी जो कोई आ रहा था बस मुझे चोदते जा रहा था। तकरीबन शाम के पाँच बजे मैंने उनसे कहा कि बस अब मुझे जाने दो और पैसे दे दो! तो उन्होंने कहा अभी कुछ देर और रुक जा। और थोड़ी देर में चली जाना। तकरीबन सवा पाँच बजे उन्होंने मेरी चुदाई बंद कर दी और मुझे कहा चल अब दफ़ा हो जा यहाँ से!

 

मैंने उन्हें कहा कि मुझे पैसे तो दे दो! तो सभी हंसने लग पड़े और कहने लगे तेरे जैसी अमीर और शहरी औरतें हमारे पास चुदवाने के लिये आती हैं और हमें ही पैसे भी देती हैं और तू हमसे पैसे माँग रही है? अब मैं समझी कि वो औरतें जो मुझसे पहले वहाँ चुद रही थीं वो पैसे दे कर इन गाँव वालों से चुदवाने के लिये आती हैं। और इसी ल्ये सुबह मुझे चोदने वाले मर्दों ने मुझसे पैसे माँगे थे। पर मेरे हालात उस वक्त दूसरे थे। मुझे तो चुदवा कर पैसे कमाने थे।

 

मैंने उनसे मिन्नत की कि मुझे पैसे बहुत ज़रूरी चाहिये तो सबने कहा लगता है ये छिनाल विशाल साहब ने यहाँ भेजी है! चलो इस कुत्ती को थोड़े बहुत पैसे सभी दे दो! हमारा ही फायदा है क्योंकि ये भी अब हमारी नई ग्राहक बनेगी।  तो सभी ने मुझे पचास-पचास रुपये दे दिये। कुल मिला कर तेरह सौ पचास रुपये ही इकट्ठे हुए।

 

अब भी मेरे पास साढ़े छः सौ रुपये कम थे। मैंने उनसे कहा कि मुझे साढ़े छः सौ रुपये और चाहिये तो उन्होंने कहा कि साली इतने दे दिये ना बहुत है अब और पैसे नहीं मिलेंगे तुझे! मैंने उनसे फ़िर से मिन्नत की और कहा कि मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ पर मुझे साढ़े छः सौ रुपये और दे दो। इस पर उनमें से एक ने कहा कि तुझे अभी के अभी एक कुत्ते और गधे का लन्ड लेना होगा। मैं ये सुनकर हैरान गयी। इस कहानी की लेखिका रिहाना हुसैन है!

 

मैंने पहले सोचा कि अगर पैसे ना लेकर गयी तो एक हफ़्ते तक कईं मर्दों से चुदाई होगी और पता नहीं विशाल क्या-क्या उल्टी सीधी सज़ा दे मुझे। इससे अच्छा तो है कि मैं अभी कुत्ते और गधे से चुदवा लूँ... एक नया तजुर्बा भी हो जायेगा। मैं इतनी ठरकी और बेशरम बन गयी थी कि जानवरों से चुदने का सोच कर गरम हो रही थी। मैंने तुरंत हाँ कर दी।

 

तभी वहाँ पर थोड़ी ही देर में कुछ मर्द एक बड़े से कुत्ते और गधे को ले कर आ गये। कुत्ते के मुँह बन्धा हुआ था ताकि वो किसी को काट ना ले। वहाँ पर बहुत भीड़ जमा हो गयी मुझे देखने के लिये। तकरीबन पूरा गाँव मुझे देखने के लिये आ गया। तकरीबन साठ-सत्तर मर्द वहाँ पर आ गये थे।

 

मैंने तभी गधे का लन्ड चूसना स्टार्ट कर दिया और कुत्ते को मेरी कमर पर चढ़ा कर मेरी चूत में कुत्ते का लन्ड डाल दिया गया। गाँव के सभी लोग कहकहे लगा रहे थे और मजे ले रहे थे। सभी बहुत मजे ले रहे थे और कह रहे थे आज तो मज़ा आ गया! ऐसी चुदाई काफी दिनों बाद देखने को मिली है! कुत्ते के लण्ड से चुदाई में मुझे भी जम कर मज़ा आया। कुत्ते से चुदते हुए मैं गधे के लन्ड का टोपा भी चुस रही थी। गधे के लन्ड के छेद से चीकना सा पानी बह रहा थ जिसे मैं पीने लगी। बहुत ही अजीब सा स्वाद था। जब कुत्ते का वीर्य मेरी चूत में निकल गया तो मेरी चूत में गधे का लन्ड लेने की बारी थी। मेरे चूसने और मेरे हाथों की मालिश से गधे का लन्ड तो तन कर बहुत ही ज्यादा बड़ा हो गया था। तकरीबन पंद्रह-सोलह इंच से भी ज्यादा बड़ा लन्ड होगा उस गधे का। उस तने हुए लन्ड का साइज़ देखकर एक बार तो मैं सिहर गयी लेकिन मेरी चूत उससे चुदने के लिये मचलने लगी। इस कहानी की लेखिका रिहाना हुसैन है!

 

मैंने गधे के नीचे लेट कर चुदने के लिये पोज़िशान ले ली। मेरा सिर और कंधे ज़मीन पर टिके थे और पैर मज़बूती से ज़मीन पर गड़ाये हुए मैंने अपने घुटने मोड़कर अपनी गाँड हवा में उठा कर अपनी चूत गधे के फनफनाते लन्ड के पास ठेल दी। मैंने एक हाथ बढ़ा कर उसका लन्ड अपनी चूत के ऊपर टिका दिया और तभी वो गधा झटके से लन्ड मेरी चुत में पेलने लगा तो मैंने भी अपने कुल्हे लन्ड पर आगे ठेल दिये। वो लन्ड थोड़ा सा मेरी चूत में अंदर जा कर फंस गया। थोड़ा मैंने अपनी गाँड घुमा-घुमा कर हिलायी और थोड़ा गधे ने लन्ड को झटके मारे और उसका लन्ड मेरी चूत में उतरने लगा। आखिर में गधा जोर से रेंका और एक ज़ोर का धक्का मार कर लन्ड इतना अंदर उतार दिया कि अब और अंदर जाने कि गुंजाइश नहीं थी। मैं मस्ती में ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। मैं ये भी भूल गयी थी कि हमारे चारों तरफ गाँव के मर्द खड़े गधे से मेरी चुदाई का नज़रा देख रहे थे। उसके बाद मेरी गधे से चुदाई स्टार्ट हो गयी। तकरीबन २-३ मिनट की चुदाई के बाद ही मेरा जिस्म ऐंठ गया और मैं जोर से चींखते हुए भरभरा कर झड़ गयी। मेरा जिस्म इस तरह झनझनाने लगा जैसे मिर्गी का दौरा पड़ा हो। इतनी ज़ोर से मैं झड़ी कि मेरी आँखों के आगे अंधेरा छा गया। उसके बाद तो मुझे कुछ होश ही नहीं रहा।

 

तकरीबन पंद्रह-बीस मिनट तक गधा मुझे चोदता रहा और मैं बे-होशी की हालत में भी बार-बार झड़ती रही। जब मुझे होश आया तो मैं वहीं ज़मीन पर पड़ी हुई थी और मेरे ऊपर गधे का बहुत सारा वीर्य था। उसके बाद मैं उठी और मुझे उन्होंने दो हज़ार रुपये दे दिये। मैं वहाँ से विशाल के घर की तरफ़ चल पड़ी। मैं वहाँ पहुँची तो देखा कि वहाँ पर रुबीना कि चुदाई चल रही थी।

 

मैंने विशाल को कहा कि मैं दो हज़ार रुपये ले आयी हूँ। इसपर विशाल ने मुझे मेरे फटे हुए कपड़े दे दिये। मैं एक बार फिर से बाथरूम में जा कर नहायी और मैंने वो कपड़े पहन लिये। उसके बाद विशाल ने मुझे बताया कि रुबिना एक हफ़्ते के लिये यहाँ पर रह कर उससे और उसके दोस्तों से चुदने के लिये आयी है। उसके बाद मुझे विशाल ने मेरे घर छोड़ दिया। इस कहानी की लेखिका रिहाना हुसैन है!

 

इस बात को तकरीबन तीन साल हो गये हैं। उसके बाद से मुझे लन्ड लेने की ऐसी लत्त लगी कि अब तक मैं तकरीबन दो सौ से भी ज्यादा मर्दों से चुदवा चूकी हूँ। हर महीने में तकरीबन दो-तीन बार मैं विशाल के गाँव में जा कर उसके दोस्तों के अलावा गाँव के मर्दों से चुदवाती हूँ वो भी पैसे दे कर। इसके अलावा भी मैं जहाँ कहीं भी हूँ वहीं किसी ना किसी से चुदवा लेती हूँ। अपने मोहल्ले में भी कईं पड़ोसियों के साथ-साथ दूध वाले, सब्ज़ी वाले, चौंकीदार और यहाँ तक कि भिखारियों तक से चुदवाने से बाज़ नहीं आती।

 

मर्दों के अलावा मुझे जानवारों से भी चुदने की लत्त पड़ गयी। मेरे मोहल्ले की गलियों का शायद ही कोई कुत्ता बचा हो जिससे मैंने चुदवाया ना हो। तकरीबन हर रोज़ ही दिन भर में गली के एक या दो कुत्तों को फुसला कर अपने घर में ले जा कर खूब चुदवाती हूँ। कुत्तों का लन्ड झड़ने के बाद जब मेरी चूत या गाँड में फूल कर फंस जाता है तो मुझे खूब मज़ा आता है और मैं आधा-आधा घाँटा कुत्ती की तरह उनसे जुड़ी रहती हूँ। अब तो ये हाल है कि मेरे घर के गेट के बाहर गली-मोहल्ले के कुत्ते खुद ही मंडराते रहते हैं मुझे चोदने के लिये। जब भी विशाल के गाँव में जाती हूँ तो गाँव के मर्दों की मदद से किसी ना किसी गधे से ज़रूर चुदवाती हुँ। गाँव वालों के मेहरबानी से ही कुत्तों और गधों के अलावा कईं बार तो दूसरे जानवर जैसे कि घोड़ा,  बकरा,  बैल,  इनके लन्ड से भी चुदवाने का खूब मज़ा लेती हूँ।

 

मेरे शौहर जब भी छः-सात महीने में दो हफ्तों की छुट्टी लेकर आते हैं तो मैं उन्हें भी नहीं छोडती। उन्हें भी वायग्रा खिला-खिला कर घंटों उनसे चुदवाती हूँ। उन्हें मैंने ये एहसास दिला रखा कि उनके ना रहने पर मैं कितना तड़पती हुँ और जब वो आते हैं तो मैं चुदाई की महीनों की कसर उनके साथ निकालती हूँ। मुझे चोदते-चोदते अधमरे हो जाते हैं और बारह-बारह घंटे बेसुध होकर सोये पड़े रहते हैं। इस दौरान उनकी मौजूदगी में भी मैं दुसरे मर्दों और कुत्तों से चुदवा लेती हूँ।

 

!!!! समाप्त !!!!


मुख्य पृष्ठ

 

Keywords: Adultery, Fellatio, Anal, Group-sex, Bestiality (F-Dog, F-Donkey), FMMM+, Drunken Sex, Big-Cocks, Double Penetration, Triple Penetration, Public Sex, Outdoor Sex, Male Domination. Hindi Story, Hindi Font Sexy Story, High Heels, Highheels, Sandal, Salwar Kameez, Saree, India, Indian, Chut, Choot, Chutmarani, Gaand, Hindi Chudai Kahani, Kahaniya, Kutte ka Lund, Kutte se Chudai, Gadhe ka Lund, Gadhe se Chudai, Chhinal, Tharki Aurat, व्याभिचार (गैर-मर्द), मुख-मैथुन, गुदा-मैथुन, सामुहिक चुदाई, पशुगमन (स्त्री-कुत्ता और स्त्री-गधा), विवाहित औरत -अनेक मर्द, शराब, नशा, विशाल लण्ड, सार्वजनिक चुदाई, दोहरी चुदाई, तिहरी चुदाई, कुत्ते का लण्ड, कुत्ते से चुदाई, शराब, नशे में चुदाई, ऊँची हील के सैंडल, ऊँची ऐड़ी, सेंडल, सैंडिल, सेंडिल, साड़ी, सलवार कमीज़, हिंदी, भारत, इंडिया, हिंदी कहानियाँ, हिन्दी, चूतमरानी, गधे का लंड, गधे से चुदाई, छिनाल, ठरकी औरत

Adultery, Fellatio, Anal, Group-sex, Bestiality (F-Dog, F-Donkey), FMMM+, Drunken Sex, Big-Cocks, Double Penetration, Triple Penetration, Public Sex, Outdoor Sex, Male Domination. Hindi Story, Hindi Font Sexy Story, High Heels, Highheels, Sandal, Salwar Kameez, Saree, India, Indian, Chut, Choot, Chutmarani, Gaand, Hindi Chudai Kahani, Kahaniya, Kutte ka Lund, Kutte se Chudai, Gadhe ka Lund, Gadhe se Chudai, Chhinal, Tharki Aurat, व्याभिचार (गैर-मर्द), मुख-मैथुन, गुदा-मैथुन, सामुहिक चुदाई, पशुगमन (स्त्री-कुत्ता और स्त्री-गधा), विवाहित औरत -अनेक मर्द, शराब, नशा, विशाल लण्ड, सार्वजनिक चुदाई, दोहरी चुदाई, तिहरी चुदाई, कुत्ते का लण्ड, कुत्ते से चुदाई, शराब, नशे में चुदाई, ऊँची हील के सैंडल, ऊँची ऐड़ी, सेंडल, सैंडिल, सेंडिल, साड़ी, सलवार कमीज़, हिंदी, भारत, इंडिया, हिंदी कहानियाँ, हिन्दी, चूतमरानी, गधे का लंड, गधे से चुदाई, छिनाल, ठरकी औरत

Adultery, Fellatio, Anal, Group-sex, Bestiality (F-Dog, F-Donkey), FMMM+, Drunken Sex, Big-Cocks, Double Penetration, Triple Penetration, Public Sex, Outdoor Sex, Male Domination. Hindi Story, Hindi Font Sexy Story, High Heels, Highheels, Sandal, Salwar Kameez, Saree, India, Indian, Chut, Choot, Chutmarani, Gaand, Hindi Chudai Kahani, Kahaniya, Kutte ka Lund, Kutte se Chudai, Gadhe ka Lund, Gadhe se Chudai, Chhinal, Tharki Aurat, व्याभिचार (गैर-मर्द), मुख-मैथुन, गुदा-मैथुन, सामुहिक चुदाई, पशुगमन (स्त्री-कुत्ता और स्त्री-गधा), विवाहित औरत -अनेक मर्द, शराब, नशा, विशाल लण्ड, सार्वजनिक चुदाई, दोहरी चुदाई, तिहरी चुदाई, कुत्ते का लण्ड, कुत्ते से चुदाई, शराब, नशे में चुदाई, ऊँची हील के सैंडल, ऊँची ऐड़ी, सेंडल, सैंडिल, सेंडिल, साड़ी, सलवार कमीज़, हिंदी, भारत, इंडिया, हिंदी कहानियाँ, हिन्दी, चूतमरानी, गधे का लंड, गधे से चुदाई, छिनाल, ठरकी औरत


Online porn video at mobile phone


asstr Windelsexstories about my marriage to 8 men a story of polyandrypussy kising ageted womanhttp://awe-kyle.ru/~ingrid/joesguide-authors.html?s=2?s=3सेक्स चुदाई लडकि मोटि लगि मुसलमानthe sharing family vol01 asstr archiveMädchen pervers geschichten jung fötzchencache:XypYOJqvnYAJ:awe-kyle.ru/~LS/stories/baracuda1967.html asstr.org tyke ffasstr ped mind control helmetbaron long make girl squierz pornKleine Fötzchen im Urlaub perverse geschichtencache:sjlL3tDuTkgJ:awe-kyle.ru/~Sebastian_Rooks/main.html दारू के नशे में घर के मॉल की बुरी फार चुड़ै हिंदी सेक्स स्टोरीcache:qfdAOVZsXTMJ:awe-kyle.ru/files/Authors/LS/www/stories/baracuda2702.html xxxvldeo2013ferkelchen lina und muttersau sex story asstrINCEST IMREGNATION SEX STORIES.cache:_LCRME0VuzoJ:awe-kyle.ru/files/Authors/LS/www/stories/xmen6249.html Kleine ärschchen geschichtenferkelchen lina und muttersau sex story asstrferkelchen lina und muttersau sex story asstrChris Hailey's Sex Storiesfiction porn stories by dale 10.porn.comगाँड मरवा लीcache:TU8he55iloYJ:awe-kyle.ru/~LS/dates/2013-05.html माँ का चुदक्कड़ बेटाचूतें बदल करमाँ की सील तोड़ी इन हिंदीcache:NM5lQOiTt-IJ:awe-kyle.ru/~puericil/links.html राज अग्रवाल की चुदाई की कामुक कहानियाचोदो खूब चोदो कहानी"her stump" labiadann nahm meine schwester meinen jungenpimmel tief in ihre munder sprizte ihr seinen babysaft in ihre möseDeana Johns castle in the sandCumoholic storiesboy painful dp asstr.orgcache:dvXKqyUeLQ0J:awe-kyle.ru/~Taakal/deutsche_geschichten/eine_ganz_normale_familie_kapitel1.html?s=6 महकती जवानी सेक्सी माँ की चुदाई स्टोरी इन हिंदीशराब पिलाकर रनडी मॉ का दलाल बनाCruel Unusual FemDomcache:vfQJAb4ysKsJ:awe-kyle.ru/~Dutchboy/Pryn3.html mom and son become husband and wife and gave birth six babies pregnant sex stories asstrmom dom ped lesbianВыебу тебя сладко и глубокоसेक्सी कहानी मॉ बहन चाची और घर का नौकरचुदासी चूत को मोटा लन्ड से चुदाईmeinen hengstschwanz in sein maul gestopftwww.xxx.com white pani bhosh maisewww.awe-kyleru~ls dtoryserotic school humiliation storyunremovable panty poop storycache:MJ-LO6JjTREJ:awe-kyle.ru/~LS/stories/erzieher7633.html Adult sister little brother ped stories kristen archivesKristen archive incestsabrina jaisi gaanddi did not intend to cum in her mouthcache:A9pwpA1e4KAJ:http://awe-kyle.ru/~LS/stories/dale106159.html+dale10 boy broke both legsmusste ihr dreckiges arschloch ausleckencache:rHiJ-xAESxUJ:awe-kyle.ru/~LS/authors/uuu.html Chris Hailey's Sex Storiesfiction porn stories by dale 10.porn.comमेरी कमसिन चूत बेटे ने मारीcache:IrV3WnDEUyQJ:awe-kyle.ru/~Dandy_Tago/FavoriteAuthors.html Synette's bedtime storieslund se dhunai kahaniजब मैं सोने के लिए अचानक mastubrat मुझे जानाstories mixoscopist fuck me like a whore rundi ki tarah chodh moaningnialos leaning presents agnicache:IOgm_tRW_y0J:https://pegast-irk.ru/~LS/stories/baracuda1997.html cache:3IaxV28Y6coJ:awe-kyle.ru/~LS/stories/erzieher7225.html grandfather feeds his grandson with his cock